Saturday, August 30

मंगला गौरी व्रत कथा (Mangla Gauri Vrat Katha)

mangla gauri vrat katha

मंगलागौरी व्रत कथा (Mangla Gauri Vrat Katha)

सावन मास का प्रत्येक मंगलवार मंगला गौरी माता (Mangla Gauri Mata) की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। मंगलागौरी व्रत (Mangla Gauri Vrat) केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सौभाग्य और समृद्धि का व्रत है। मान्यता है कि जो भी स्त्री पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से माता गौरी (Mata Gauri) का पूजन करती है, उसके जीवन में अखंड सुहाग, गृहस्थ सुख और समृद्धि का वास होता है।

यह व्रत मुख्यतः विवाहित महिलाओं द्वारा किया जाता है ताकि उनका दांपत्य जीवन सुखमय बना रहे, लेकिन अविवाहित कन्याएँ भी इसे उत्तम वर की प्राप्ति के लिए करती हैं। यह परंपरा प्राचीन काल से चली रही है और आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है।

मंगलागौरी व्रत का महत्वक्यों है इतना खास?

मंगलागौरी व्रत (Mangla Gauri Vrat) सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं है, यह स्त्री-शक्ति, आस्था और प्रेम का प्रतीक है। सावन के मंगल दिनों में माता गौरी का पूजन करने से माना जाता है कि जीवन की सभी कठिनाइयाँ दूर होती हैं, घर-परिवार में शांति आती है और दांपत्य संबंधों में मधुरता बनी रहती है।

धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि "यत्र गौरी, तत्र लक्ष्मी", अर्थात जहाँ माता गौरी का वास होता है, वहाँ लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है। इसीलिए यह व्रत केवल सौभाग्य के लिए, बल्कि आर्थिक प्रगति और पारिवारिक सुख-शांति के लिए भी किया जाता है।

मंगलागौरी व्रत का इतिहास और मान्यता

पुराणों में वर्णित है कि माता पार्वती ने कठोर तप कर भगवान शिव (Bhagwan Shiv) को पति के रूप में प्राप्त किया था। उनके तप का यह व्रत नारी जीवन में सौभाग्य और समृद्धि का संदेश देता है। तभी से यह परंपरा चली रही है कि विवाहित स्त्रियां सावन में मंगलागौरी की पूजा करें और व्रत रखें।

मंगलागौरी पूजा विधि और सामग्री

पूजा के लिए लाल वस्त्र, गंगा जल, अक्षत, चंदन, फूल, पान, सुपारी, नारियल, मौली, दीपक, घी, मौसमी फल और मिठाई रखें।
विधि:

· प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

· चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां auri की प्रतिमा रखें।

· दीपक जलाकर मंगलायै नमः मंत्र का जाप करें।

· कथा सुनें और अंत में आरती करें।

· ब्राह्मण या कन्याओं को दान दें।

मंगलागौरी से जुड़ी कथाएं

एक समय की बात है, एक निर्धन ब्राह्मण परिवार की कन्या का विवाह एक समृद्ध परिवार में हुआ। विवाह के बाद उसकी सास ने ज्योतिषियों से उसके पति का भविष्य जाना, जिसमें बताया गया कि उसका पति अल्पायु है। यह सुनकर लड़की व्याकुल हो गई। सास ने उसे मंगलागौरी का व्रत करने की सलाह दी। उसने पूरी श्रद्धा से सावन मास के मंगलवार उपवास किया, कथा सुनी और मां गौरी की आराधना की। देवी प्रसन्न होकर उसके पति की आयु बढ़ा दी और उनके घर में सुख-समृद्धि भर दी।

तभी से मान्यता है कि यह व्रत जीवन की कठिनाइयों को दूर करता है और दांपत्य जीवन में सुख-संपन्नता लाता है।

व्यापारी की पुत्रवधू की कहानी

एक धनी व्यापारी के पुत्र की पत्नी ने यह व्रत किया। पूजा के समय उसने केवल उपवास किया बल्कि गरीबों को भोजन भी कराया। मां गौरी ने प्रसन्न होकर उसके घर में अन्न-धन की कभी कमी नहीं होने का आशीर्वाद दिया।

संकट मोचन कथा

एक महिला का पति विदेश यात्रा पर था। अचानक वहां युद्ध छिड़ गया। महिला ने मंगलागौरी का व्रत रखा और देवी से प्रार्थना की। कुछ ही समय में उसका पति सुरक्षित लौट आया। तभी से यह व्रत संकटों को हरने वाला माना जाता है।

मां गौरी की कृपा पाने का सरल उपाय

श्रीं ह्रीं मंगलागौर्यै नमःमंत्र का 108 बार जाप करें। कथा श्रवण और व्रत करने से देवी auri की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।

मंगलागौरी व्रत से जुड़े रोचक प्रश्न

1. मंगलागौरी व्रत कितने मंगलवार तक रखा जाता है?

यह व्रत सावन माह के सभी मंगलवार को किया जाता है। प्रायः 4 मंगलवार आते हैं, लेकिन यदि 5 पड़ें तो सभी करना शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर यह व्रत लगातार 16 मंगलवार करने की भी परंपरा है।

2. क्या अविवाहित कन्याएँ भी यह व्रत कर सकती हैं?

हाँ, यह व्रत केवल विवाहित स्त्रियों तक सीमित नहीं है। अविवाहित कन्याएँ भी इसे कर सकती हैं, क्योंकि मान्यता है कि इससे योग्य वर और सुखी गृहस्थ जीवन प्राप्त होता है। कई परिवारों में इसे विवाह-योग्य आयु की लड़कियों के लिए अनिवार्य माना जाता है।

3. व्रत के दौरान कौन-सी विशेष वस्तुएँ अर्पित करनी चाहिए?

पूजन में लाल फूल, सुपारी, पान के पत्ते, नारियल, रोली, चूड़ियाँ, और श्रृंगार का सामान विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं। व्रत समाप्ति पर सुहागिन स्त्रियों को वस्त्र और श्रृंगार सामग्री दान करने का नियम है, जिससे पुण्य बढ़ता है।

4. इस व्रत का मूल उद्देश्य क्या है?

मुख्य उद्देश्य है अखंड सौभाग्य, दांपत्य-सुख, संतान-प्राप्ति और घर में सुख-शांति। मान्यता है कि मंगलागौरी का आशीर्वाद जीवन की बाधाएँ दूर करता है और समृद्धि लाता है।

5. क्या इस व्रत में कोई विशेष कथा सुनाई जाती है?

हाँ, मंगलागौरी व्रत कथा सुनना और सुनाना अनिवार्य माना गया है। इसमें देवी के चमत्कार और भक्तों के जीवन में आए बदलाव का वर्णन है। कथा सुनने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

6. व्रत में क्या खाया जा सकता है?

पूरे दिन का उपवास रखने पर केवल जल या फल लिया जा सकता है। फलाहार करने वालों के लिए साबूदाना खिचड़ी, दूध, मिठाई, और मौसमी फल उपयुक्त हैं। नमक और अनाज से बचना चाहिए।

7. मंगलागौरी व्रत का सबसे बड़ा लाभ क्या माना जाता है?

यह व्रत केवल अखंड सौभाग्य देता है बल्कि जीवन की बाधाओं का निवारण, दांपत्य-सौख्य, आर्थिक प्रगति और मानसिक शांति प्रदान करता है। देवी की कृपा से परिवार में स्थिरता और समृद्धि आती है।

8. क्या व्रत तोड़ने पर कोई दोष लगता है?

हाँ, यदि संकल्प लेकर व्रत अधूरा छोड़ दिया जाए तो अशुभ माना जाता है। ऐसे में प्रायश्चित हेतु अगली सावन मास में दोगुने मंगलवार व्रत करने की परंपरा है।

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