माँ वैष्णो देवी (Maa Vaishno Devi)

Maa Vaishno Devi

माँ वैष्णो देवी (Maa Vaishno Devi)

माँ वैष्णो देवी (Maa Vaishno Devi), दैवीय शक्ति और करुणा का अवतार हैं जो भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य में पवित्र वैष्णो देवी मंदिर (Vaishno Devi Temple in Jammu and Kshmir) में पूजी जाने वाली एक श्रद्धेय हिंदू देवी हैं। सुंदर पहाड़ियों के बीच स्थित माँ वैष्णो देवी का मंदिर (Maa Vaishno Devi Mandir) उनके भक्तों के लिए अलग ही स्थान रखता है। वैष्णो देवी मंदिर एक श्रद्धेय तीर्थ स्थल है। माँ वैष्णो देवी हिंदू पौराणिक कथाओं में अत्यधिक महत्व रखती हैं। हर साल लाखों भक्त देवी मां, माता वैष्णो देवी से आशीर्वाद लेने के लिए आध्यात्मिक यात्रा पर निकलते हैं।

वैष्णो देवी का अर्थ (Meaning Of Vaishno Devi)

"वैष्णो देवी" नाम संस्कृत शब्द "वैष्णवी" और "देवी" से लिया गया है, जो देवी को सर्वोच्च शक्ति, भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) और दिव्य माँ के अवतार के रूप में दर्शाता है। वैष्णो देवी शक्ति के अवतार का प्रतिनिधित्व करती हैं। ब्रह्मांडीय ऊर्जा जो स्त्री शक्ति और ताकत का प्रतीक है। वह ऊर्जा वैष्णो देवी के रूप में आशीर्वाद, सुरक्षा और आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजनीय है।

माँ वैष्णो देवी की उत्पत्ति की कहानी (Origin story of Maa Vaishno Devi)

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, वैष्णो देवी (Vaishno Devi) की उत्पत्ति की कहानी देवी शक्ति की कथा के इर्द-गिर्द घूमती है। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने वैष्णवी (Vaishnavi) के रूप में जन्म लिया, जो असाधारण सुंदरता और दिव्य शक्ति वाली एक युवा लड़की थी। वैष्णवी एकांत में ध्यान करना चाहती थी और त्रिकुटा पर्वत (Trikuta Parvat) की यात्रा पर निकल पड़ी, जहाँ उसने दिव्य माँ वैष्णो देवी (Maa Vaishno Devi) के रूप में एक अमर रूप प्राप्त किया। बचपन में माता का नाम त्रिकुटा था। लेकिन उनका जन्म भगवान विष्णु के वंश से हुआ था इसलिए बाद में उनका नाम वैष्णवी पड़ा।

इसके अलावा किवदंतियों के अनुसार, कहा जाता है कि माँ वैष्णो देवी (Maa Vaishno Devi) का जन्म दक्षिण भारत में रत्‍‌नाकर सागर के घर हुआ था। उनका प्रारम्भिक नाम त्रिकुटा था। माँ वैष्णों ने जन्म के पहले ही रत्‍‌नाकर सागर (Ratnakar Sagr) से वचन ले लिया था कि वे उनकी इच्छा के रास्ते में कभी नहीं आएंगे। इसलिए जब त्रिकुटा 9 साल की थीं, तब उन्होंने अपने पिता से समुद्र के किनारे तपस्या करने की अनुमति मांगी। त्रिकुटा समुद्र के किनारे भगवान विष्णु की तपस्या में लीन थीं। सीता (Mata Sita) की खोज करते समय भगवान श्रीराम अपनी सेना के साथ समुद्र के किनारे पहुंचे। उन्होंने इस दिव्य बालिका को देखा। तब त्रिकुटा ने उनसे कहा कि उन्होंने श्रीराम को अपना पति मान लिया है। इस पर भगवान श्रीराम ने कहा कि त्रेतायुग में वो सिर्फ सीता (Devi Sita) के प्रति निष्ठावान हैं। लेकिन उन्होंने त्रिकुटा को आश्वासन दिया कि कलियुग में वे कल्कि के रूप (Kalki Avatar) में प्रकट होंगे और उससे विवाह करेंगे। साथ ही श्रीराम ने त्रिकुटा से माणिक पहाडि़यों की त्रिकुटा श्रृंखला की गुफाओं में रहने के लिए कहा। तब से त्रिकुटा माँ वैष्णो (Maa Vaishno) के रूप में वहां लीन हैं।

वैष्णो देवी का रूप और प्रकटीकरण (Form and Appearance of Vaishno Devi)

वैष्णो देवी (Vaishno Devi) की मुख्य रूप से पवित्र गुफा मंदिर के भीतर स्थित तीन रॉक-कट पिंडियों (पत्थर की मूर्तियों) के रूप में पूजा की जाती है। ये पिंडियाँ अपने तीन दिव्य रूपों में देवी का प्रतिनिधित्व करती हैं: महा काली (Maha Kali), महा लक्ष्मी (Maha Lakshni) और महा सरस्वती (Maha Saraswati)। महा काली, शक्ति और विनाश का प्रतीक है, महा लक्ष्मी, धन और समृद्धि का प्रतीक है, और महा सरस्वती, ज्ञान का प्रतिनिधित्व करती हैं।

पूजा और अनुष्ठान (Worship and Rituals of Maa Vaishno)

वैष्णो देवी की तीर्थ यात्रा (Vaishno Devi ki Tirth Yatra) हर साल लाखों भक्तों द्वारा की जाने वाली एक पवित्र यात्रा है। त्रिकुटा पर्वत (Trikuta mountain) के आधार पर स्थित शहर, कटरा (Katra) से तीर्थयात्री अपनी आध्यात्मिक खोज शुरू करते हैं। मंदिर की कठिन यात्रा लगभग 14 किलोमीटर तक फैली हुई है जिसे भक्ति और समर्पण की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाता है। इसलिए ज्यादातर यात्री इसे पैदल ही पूरी करते हैं। त्रिकुटा पर्वत की चढ़ाई के दौरान भक्त माता को समर्पित भजन और कीर्तन भी गाते हैं।

तीर्थयात्रा के दौरान भक्त विभिन्न नियमों का पालन करते हैं। जैसे उपवास करना, प्रार्थना करना और भजन पढ़ना, और देवी के नाम का जाप करने के लिए माला ले जाना। कई तीर्थयात्री यात्रा शुरू करने से पहले एक मनोकामना लेने में विश्वास करते हैं, जो मंदिर में सफलतापूर्वक पहुंचने पर पूरी होती है।

नाम और श्रद्धा (Name and Faith to Vaishno Devi)

वैष्णो देवी (Vaishno Devi) को कई नामों से जाना जाता है, प्रत्येक नाम उनके दिव्य स्वरूप के एक अलग पहलू को दर्शाता है। उनके कुछ महत्वपूर्ण नामों में माता रानी (Maata Rani), वैष्णवी, दुर्गा (Durga Maa) तथा शेरावाली माता (Sherawali Maa) प्रसिद्ध हैं। भक्त अपनी आराध्य माँ वैष्णो देवी को इन्हीं नामों से पुकारते हैं।

माँ वैष्णों की आरती (Aarti of Maa Vaishno)

जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।

हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥

शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी।

गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥

ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे।

सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥

सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे।

बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे॥

भवन पे झण्डे झूलें, घंटा ध्वनि बाजे।

ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे॥

पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट पुष्प मेवा।

दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा॥

जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे।

उसकी इच्छा पूरण, माता हो जावे॥

इतनी स्तुति निश-दिन, जो नर भी गावे।

कहते सेवक ध्यानू, सुख सम्पत्ति पावे॥

 

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1 Comments:

  1. Kanhaiya Kanhaiya says:

    आपकी वेबसाइट में स्थित माँ वैष्णो देवी के संबंध में मैं वाकई आभारी हूँ। यह एक अत्यंत प्रेरणादायक स्थान है जिसे देखकर मेरा मन शांति से भर जाता है और चेतना का अनुभव होता है।

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