शनि चालीसा (Shani Chalisa)

Shani Chalisa

शनि चालीसा (Shani Chalisa)
।। ॐ शनिश्चराय नमः।।

आप पर साढ़े साती (Sade Sati) हो, शनि की ढैया (Shani ki Dhaiya) हो, काम लगातार बिगड़ रहे हो या जीवन की कठिनाइयां खत्म ही नहीं हो रही हो, तो एक बार शनि देव महाराज (Shani Dev Maharaj) की पूजा करके देखें…आपके सभी बिगड़े काम बन जाएंगे। शनि देव (Shani Dev) की कृपा पाने के लिए शनि देव की चालीसा (Shani Dev ka Chalisa) का रोजाना पाठ एक सरल और कारगर उपाय है।

शनि देव चालीसा (Shani Dev Chalisa) शनि देव की महिमा (Shani Dev Ki Mahima) का वर्णन है। आइए श्री शनि चालीसा (Shri Shani Chalisa) का संपूर्ण हिंदी अर्थ जाने ताकि आप शनि देव (Shani Dev) के महात्म्य को और अधिक पहचान सके।

Shani Chalisa Lyrics

शनि चालीसा (Shani Chalisa) हिंदी अर्थ सहित

(Shani Chalisa With Meaning In Hindi)

।।दोहा।।

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

हे शनिदेव जी महाराज (Shani Dev JI Maharaj) आपकी जय हो। हे प्रभु, हमारी प्रार्थना सुनें। हे रविपुत्र हम पर कृपा करें। सभी भक्तजनों की लाज रखें।

।।चौपाई।।

जयति जयति शनिदेव दयाला।

करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

(हे दयालु! शनिदेव जी महाराज (Shani Dev Ji Maharaj) आपकी जय हो। आप हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करते है। आप उनके पालनहार है)

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।

माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥

(आपका श्याम वर्ण है और आपकी चार भुजाएं है। आपके माथे पर रत्न जड़ित मुकुट शोभायमान है)

परम विशाल मनोहर भाला।

टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

(आपका रूप बहुत ही मनोहर है और आपका भाला बहुत ही विशाल है। आप टेढी दृष्टि से देखते है । शनिदेव (Shani Dev) को यह श्राप मिला हुआ था कि जिस पर भी उनकी दृष्टि पड़ेगी उसका अनिष्ट होगा इसलिए आप हमेशा टेढी दृष्टि से देखते है ताकि आपकी सीधी दृष्टि से किसी का अहित न हो) आपकी भौंहें विकराल है।

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।

हिय माल मुक्तन मणि दमके॥

(आपके कानों में सोने के कुंडल चमचमाते है। आपकी छाती पर मोतियों व मणियों की माला दमकती है)

कर में गदा त्रिशूल कुठारा।

पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

(आपके हाथों में गदा, त्रिशूल और कुठार है, जिनसे आप पल भर में शत्रुओं का संहार कर देते हो)

पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन।

यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा।

भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

(पिंगल, कृष्ण, छाया नंदन, यम, कोणस्थ, रौद्र, दु:खभंजन, सौरी, मंद, शनि ये आपके दस नाम है। हे सूर्यपुत्र! आपको पूजने से सब काम बन जाते है)

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं।

रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥

(आप जिस पर प्रसन्न हो जाते है, वह एक क्षण में रंक से राजा बन जाता है)

पर्वतहू तृण होई निहारत।

तृणहू को पर्वत करि डारत॥

(उसे पहाड़ जैसी समस्या भी घास के तिनके जैसी छोटी लगती है और जिस पर आप नाराज होते है उसकी छोटी सी समस्या भी पर्वत जैसी बड़ी बन जाती है)

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो।

कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥

(शनि दशा के कारण ही श्रीराम (Bhagwan Shri Ram) को राज मिलते-मिलते वनवास मिल गया। आपकी दशा के कारण कैकई के मन में ऐसा बुद्धिहीन विचार आया)

बनहूँ में मृग कपट दिखाई।

मातु जानकी गई चुराई॥

(माता सीता को वन में मायावी मृग रूपी कपट दिखा और उनका अपहरण हुआ)

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा।

मचिगा दल में हाहाकारा॥

(शनि दशा के कारण ही लक्ष्मण जी के प्राणों पर भी काल का साया मंडराया था और सारी सेना में हाहाकार मच गया)

रावण की गति-मति बौराई।

रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥

(आप की दशा के कारण ही रावण की बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी और उन्होंने राम जी से बैर बढ़ाया)

दियो कीट करि कंचन लंका।

बजि बजरंग बीर की डंका॥

(आप प्रसन्न थे तो बजरंगबली हनुमान (Bajrangbali Hanuman) ने सारी लंका जला दी और उनका डंका सारे संसार में बजा)

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।

चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

(आप नाराज थे तो राजा विक्रमादित्य को राजपाट छोड़कर जंगलों में भटकना पड़ा और उन्हें कलंकित करने के लिए तस्वीर में बने हुए मोर ने हार को निगल लिया)

हार नौलखा लाग्यो चोरी।

हाथ पैर डरवायो तोरी॥

(राजा विक्रमादित्य पर नौलखा हार चुराने का आरोप लगा। इसी आरोप में उन्हें डर लगा कि कहीं उनके हाथ पैर ना तुड़वा दिए जाए)

भारी दशा निकृष्ट दिखायो।

तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥

(शनिदशा के कारण ही विक्रमादित्य को तेली के घर कोल्हू चलाना पड़ा)

विनय राग दीपक महं कीन्हयों।

तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥

(लेकिन जब दीपक राग में उन्होंनें प्रार्थना की तो आपने प्रसन्न होकर उनकी सुख समृद्धि उन्हें लौटा दी)

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।

आपहुं भरे डोम घर पानी॥

(आपकी दशा लगने पर राजा हरिश्चंद्र को अपनी पत्नी तक को बेचना पड़ा और उन्हें डोम के घर पर पानी भरना पड़ा)

तैसे नल पर दशा सिरानी।

भूंजी-मीन कूद गई पानी॥

(उसी प्रकार राजा नल व रानी दयमंती को भी कष्ट उठाने पड़े, पकाई हुई मछली भी वापस पानी में कूद गई और उन दोनों को भूखा रहना पड़ा)

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।

पारवती को सती कराई॥

(जब भगवान शंकर (Bhagwan Shiv Shankar) पर आप की दशा लगी तब माता पार्वती भी हवन कुंड में जलकर सती हो गई)

तनिक विलोकत ही करि रीसा।

नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥

(आपके देखने मात्र से ही गौरी पुत्र गणेश (Gauri Putra Shri Ganesha) का सिर धड़ से अलग होकर आकाश में उड़ गया था)

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।

बची द्रौपदी होति उघारी॥

(पांडवो पर जब आपकी दशा लगी द्रोपती का चीरहरण होते-होते बचा)

कौरव के भी गति मति मारयो।

युद्ध महाभारत करि डारयो॥

(आप की दशा से ही कौरवों की भी मति मारी गई और महाभारत का युद्ध छेड़ दिया)

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला

लेकर कूदि परयो पाताला॥

(आप की कुदृष्टि से तो आपके पिता सूर्यदेव भी नहीं बच पाए और आप उन्हें अपने मुंह में लेकर पाताल लोक में कूद गए)

शेष देव-लखि विनती लाई।

रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥

(सभी देवताओं के लाख विनती करने के बाद ही आपने सूर्य देव को अपने मुख से आजाद किया था)

वाहन प्रभु के सात सुजाना।

जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी।

सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥

(हे प्रभु! आपके साथ वाहन है- हाथी, घोड़ा, गधा, हिरण, कुत्ता, सियार और शेर, इन वाहनों की सवारी के अनुसार ही ज्योतिष आपके फल की गणना करते है)

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।

हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥

(अगर आप हाथी पर सवार होकर आते है तो घर में लक्ष्मी आती है। यदि घोड़े पर सवार होकर आते है तो घर में सुख संपति आती है)

गर्दभ हानि करै बहु काजा।

सिंह सिद्धकर राज समाजा॥

(यदि आप गधे पर सवार हो तो कई कार्यों में अड़चन आती है। वही आपकी शेर की सवारी समाज में शानो-शौकत बढ़ाती है)

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।

मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

(वही आप की सवारी अगर सियार की हो तो बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है और हिरण की सवारी तो शारीरिक कष्ट देते हुए प्राणों पर ही संकट ला देती है)

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।

चोरी आदि होय डर भारी॥

(हे प्रभु! जब आप कुत्ते पर सवार होकर आते है तब किसी बड़ी चोरी का डर मंडराने लगता है)

तैसहि चारि चरण यह नामा।

स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥

(इसी प्रकार आपके चरण भी सोने, चांदी, लोहे और तांबे चार प्रकार के माने जाते है)

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।

धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥

(हे प्रभु! जब आप लोहे के चरणों से आते है तो धन, जन अथवा संपत्ति की हानि होती है)

समता ताम्र रजत शुभकारी।

स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥

(जब आप चांदी या तांबे के चरणों से आते है तो यह सामान्यतः शुभकारी होता है और अगर आप होने के चरणों से पधारें तो यह बहुत ही मंगलकारी और सुखदायक होता है)

जो यह शनि चरित्र नित गावै।

कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

(जो भी इस शनि चरित्र का हर रोज पाठ करता है उसे कभी भी शनिदशा का प्रकोप नहीं सताता)

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।

करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

(अपने भक्तों को शनि देव (Shani Dev) अद्भुत लीला दिखाते है और उसके शत्रुओं के बल का नाश करके उन्हें कमजोर कर देते है)

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।

विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

(जो भी व्यक्ति किसी सुयोग्य पंडित को बुलाकर पूरे विधि विधान से शनि ग्रह शांत  कराता है)

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।

दीप दान दै बहु सुख पावत॥

(शनिवार के दिन जो भी भक्त पीपल पर जल चढ़ाकर धूप और दीप जलाता है, उसे बहुत सुख मिलता है)

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।

शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥

(प्रभु शनिदेव (Prabhu Shani Dev) के दास रामचंद्र जी कहते है कि भगवान शनि के सवर्ण से सुख की प्राप्ति होती है व जीवन ज्ञान के प्रकाश से भर जाता है)

।।दोहा।।

पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार।

करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

(भक्तों द्वारा तैयार भगवान शनि देव (Lord Shani) की श्री शनि देव चालीसा (Shri Shani Dev Chalisa) का जो कोई भी लगातार 40 दिन तक पाठ करता है वह शनि भगवान (Shani Bhagwan) की कृपा से भवसागर से पार हो जाता है)

।।इति श्री शनि देव चालीसा (Shani Dev Chalisa) संपूर्ण।।

शनिदेव की चालीसा (Shani Dev Ki Chalisa) संपूर्ण हुई।

शनिवार के दिन शनि मंदिर में श्री शनि देव जी की चालीसा (Shri Shani Dev Ji Ki Chalisa) का पूर्ण विश्वास के साथ श्रद्धा पूर्वक पाठ करता है, “जय शनि देव” “Jai Shani Dev” जयकारा लगाता है। शनि महाराज (Shani Maharaj) उसकी हर मनोकामना पूर्ण करते है और उसके सारे बिगड़े काम सफल हो जाते है। 

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1 Comments:

  1. Tanay Chaudhari Tanay Chaudhari says:

    आपका योगदान भक्तों के जीवन में प्रेरणा और शांति लाने में महत्वपूर्ण है।

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